खत्म हो गया ‘हास्य-गैस सिलेंडर’, टूट गई हास्य कवि प्रदीप चौबे के सांसों की डोर

ग्वालियर/ प्रसिद्ध हास्य कवि प्रदीप चौबे का ग्वालियर में गुरुवार की रात को हृदयाघात से निधन हो गया। वह 70 वर्ष के थे। उनके करीबियों से मिली जानकारी के अनुसार, चौबे पिछले कुछ अरसे से कैंसर से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था। गुरुवार को ही उन्हें निजी अस्पताल से छुट्टी मिली थी। घर पर देर रात घबराहट होने के बाद उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जहां रात दो बजे के आसपास उनका निधन हो गया।

उनके करीबियों का कहना है कि वो जितना लोगों को हंसाते थे उनता ही अपने अंदर के ग़म को छुपाए रहते थे। उन्हें गाल ब्लैडर का कैंसर भी था। पिछले दिनों हुई छोटे बेटे की आकस्मिक मृत्यु के बाद उन्हें गहरा सदमा लगा था। उनके निधन से साहित्य समाज को अपूरणीय क्षति पहुंची है। हिंदी मंचों के धुरंधर हास्य-कवियों में प्रदीप चौबे का नाम अग्रणी था। वे ‘हास्य-गैस सिलेंडर’ कहे जाते थे। नॉन स्टॉप ठहाकों की गारंटी माने जाते थे। हंसाने की उनकी शैली और अंदाज़े-बयां सबसे अलग एवं अनूठा था। हास्य-रस प्रदीप चौबे को विरासत में मिला। उनके बड़े भाई हास्य के महापंडित कवि स्व. शैल चतुर्वेदी को कौन नहीं जानता! परंतु जैसे हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, प्रदीप चौबे का दूसरा पहलू था कि वे एक मंझे हुए शायर भी थे, बहुत खूबसूरत गज़लें कहते थे, और इसे ही वे अपना असली चेहरा मानते हैं। मंचों और सोशल मीडिया पर उनकी माइक्रो कविताएं ‘आलपिन’ के रूप में का़फी धूम-धड़ाका करती थीं। भारत-प्रसिद्ध मुंबई के हास्य समारोह के आयोजक स्व. रामावतार चेतन ने उनके सम्मान में मिर्जा गालिब का एक पैरोडी शेर कहा है— ‘हैं और भी हंसनवर भारत में बहुत अच्छे, कहते हैं कि चौबे का है अंदाज़े-बयां और।’

 

प्रदीप चौबे की जीवन यात्रा के मुख्य पड़ाव

जन्म : 26 अगस्त, 1949 (गणेश चतुर्थी) को चंद्रपुर (महाराष्ट्र) में।

शिक्षा : कला-स्नातक (नागपुर वि.वि.)।

रचना-संसार : ‘बहुत प्यासा है पानी’, ‘खुदा गायब है’ (गजल संग्रह), ‘बाप रे बाप’ (हास्य-व्यंग्य कविताएं), ‘आलपिन’ (छोटी कविताएं), ‘चले जा रहे हैं’ (हास्य-व्यंग्य गज़लें) एवं कुछेक गद्य-व्यंग्य रचनाओं का कन्नड़ व गुजराती भाषाओं में प्रकाशन।

संपादन : ‘आरंभ-1’ (वार्षिकी), ‘आरंभ-2’ (गज़ल विश्वांक-1), ‘आरंभ-3’ (गज़ल विशेषांक), ‘आरंभ-4’ (गज़ल विश्वांक-2) का।

सम्मान-पुरस्कार : पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा द्वारा लोकप्रिय हास्य-कवि के रूप में सम्मानित, ‘काका हाथरसी पुरस्कार’, ‘अट्टहास युवा पुरस्कार’, ‘टेपा पुरस्कार’, ‘अट्टहास शिखर पुरस्कार’।

साहित्यिक यात्राएं : बैंकॉक, हांगकांग, सिंगापुर, दुबई, बेल्जियम, अमेरिका, स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी, मस्कट, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन आदि।

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