दिव्य-भव्य और ऐतिहासिक होगा प्रधानमंत्री मोदी का शपथ ग्रहण

अभय तिवारी

नई दिल्ली / दो सांसदों की पार्टी से शुरूआत करने के बाद लगातार दूसरी बार केन्द्र में अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जा रही भाजपा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह को दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक बनाने की तैयारियों में जुटी है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस शपथ ग्रहण समारोह का साक्षी बनने के लिये पांच हजार से अधिक देसी-विदेशी गणमान्य लोगों व अतिथियों को निमंत्रण पत्र भेजा जा रहा है। इस बार के शपथ ग्रहण समारोह को दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिये राष्ट्रपति भवन और भाजपा संगठन के अलावा भारत सरकार की एजेंसियां भी दिन-रात जुटी हुई हैं। ‘पड़ोस प्रथम’ की स्थापित नीति का अनुसरण करते हुए इस समारोह का साक्षी बनने के लिये बंगाल की खाड़ी से लगती सीमाओं वाले देशों के अंतरराष्ट्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग संगठन यानि बिम्सटेक से सभी सदस्य देशों बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड के अलावा माॅरिशस के प्रधानमंत्री सहित दिल्ली में स्थित सभी देशों के दूतावासों को भी न्यौता भेजा गया है। साथ ही देश के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों व बड़े नेताओं सहित सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों व राज्यपालों को भी आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा उद्योग जगत, शिक्षा जगत, सिने जगत और खेल जगत सहित समाज के सभी वर्गों की कई प्रमुख चेहरों को भी इस आयोजन में शामिल होने के लिये निमंत्रण पत्र भेजा जा रहा है।

राष्ट्रपति भवन से मिली औपचारिक जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गुरूवार को शाम 7 बजे राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। दरअसल वर्ष 2014 में भी प्रधानमंत्री के तौर पर नरेन्द्र मोदी के पहले शपथ ग्रहण को दिव्य-भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी और पिछली बार उनके शपथ ग्रहण समारोह में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ यानि सार्क देशों के नेताओं को आमंत्रित किया गया था जिनमें पाकिस्तान भी शामिल था। पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने उस समय मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत की थी। लेकिन इस बार सार्क देशों के बजाय बिम्सटेक संगठन के देशों को निमंत्रित करने का निर्णय किया गया है जिसमें पाकिस्तान शामिल नहीं है। बहरहाल मोदी के मौजूदा शपथ ग्रहण को सिर्फ भाजपा संगठन, केन्द्र सरकार और राष्ट्रपति भवन के अथक प्रयासों से ही दिव्यता और भव्यता नहीं मिल रही है बल्कि ज्योतिषीय व खगोलीय लिहाज से भी इस बार के शपथ ग्रहण का मुहूर्त बेहद दिव्य-भव्य है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को शाम सात बजे जब शपथ ग्रपथ ग्रहण करेंगे तब रेवती नक्षत्र का चतुर्थ चरण चल रहा होगा। दिन भी वृहष्पतिवार का होगा और एकादशी वैसे भी गुरु का ही दिन है। ज्योतिषी के जानकारों की मानें तो इस नक्षत्र में शपथ लेना प्रधानमंत्री मोदी को और अधिक प्रभावशाली बनाएगा। साथ ही शपथ के लग्न की राशि पृथ्वी तत्व की वृश्चिक है जिसकी प्रबलता के कारण अगले कार्यकाल में उन्हें पूरे विश्व में अपार यश मिलेगा।

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