फिर एक बार बीजेपी सरकार का सपना साकार

नई दिल्ली/ चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव में 542 सीटों पर हुये मतदान के बाद लगभग दो दिन तक चली मतगणना के परिणाम घोषित कर दिये। चुनाव परिणाम के आधार पर सत्तारूढ़ भाजपा ने 303 सीटें जीत कर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद मोदी देश के तीसरे और पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जो लोकसभा में लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनायेंगे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी। सुषमा ने ट्वीट किया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी – भारतीय जनता पार्टी को इतनी बड़ी विजय दिलाने के लिए आपका बहुत बहुत अभिनन्दन। मैं देशवासियों के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त करती हूँ।’’

शुक्रवार शाम को चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से मतदान वाली सभी सीटों पर चुनाव परिणाम घोषित किये जाने की जानकारी दी गयी। सिर्फ एक सीट, पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश पर तकनीकी दिक्कतों के कारण चुनाव परिणाम घोषित नहीं किया जा सका। इस सीट से केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में थे। उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस उम्मीदवार नबाम तुकी को लगभग पौने दो लाख वोट से हराया है। आयोग द्वारा घोषित चुनाव परिणाम के मुताबिक 303 सीट जीत कर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी भाजपा के बाद कांग्रेस ने 52 सीटों पर जीत दर्ज की है। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उत्तर प्रदेश की अपनी परंपरागत अमेठी सीट से हार गए हैं। वह केरल की वायनाड सीट पर जीत हासिल करने में कामयाब रहे। वहीं द्रमुक को 23 और तृणमूल कांग्रेस तथा वाईएसआर कांग्रेस को 22-22 सीट मिली है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 282 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं। पिछले दोनों चुनाव में दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभरी कांग्रेस, लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा प्राप्त करने के लिये जरूरी 54 का आंकड़ा पार करने में नाकाम रही। नियमों के तहत कांग्रेस को 17 वीं लोकसभा में भी मुख्य विपक्षी दल का दर्जा प्राप्त नहीं हो पायेगा।

चुनाव परिणाम के मुताबिक भाजपा की अगुवाई वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दल, शिवसेना को 18, जनता दल (यू) को 16 और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) को छह सीटें मिली हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन का चुनाव में प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। बसपा को महज 10 सीटें मिली हैं, जबकि सपा के हिस्से में पांच सीटें आयी हैं। राज्य में भाजपा को 62 और उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल (सोनेलाल) को दो सीटें मिली हैं। इस चुनाव में वाम दलों, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का प्रदर्शन भी बहुत खराब रहा। दोनों दलों को महज पांच सीटें मिली हैं। वाम दलों की सीटों का यह अब तक का न्यूनतम आंकड़ा है। उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य हिंदी भाषी राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की कुल 65 सीटों में से 61 सीटें भाजपा ने जीती हैं। भाजपा की सीटों की संख्या 303 होने के साथ ही उसके सहयोगी दलों के साथ राजग गठबंधन 350 सीटों के पार पहुंच गया है। पिछले लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन को 336 सीटें मिली थीं। मोदी वाराणसी में चार लाख 79 हजार 505 मतों से जीते हैं, जबकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गुजरात में गांधीनगर लोकसभा सीट पर साढ़े पांच लाख वोट से विजयी रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस चुनाव में पंजीकृत 90.99 करोड़ मतदाताओं में से करीब 67.11 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। भारतीय संसदीय चुनाव में यह अब तक का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में देश के अन्य राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जनता की लोकप्रियता में निरंतर इजाफा हो रहा है जबकि कांग्रेस,समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का मत प्रतिशत लगातार घट रहा है। केन्द्र में सरकार के गठन में अहम योगदान देने वाले इस राज्य में भाजपा और सहयोगी दलों ने 17वीं लोकसभा के चुनाव में 80 में से 64 सीटों पर कब्जा जमाया है वहीं कांग्रेस को एक, सपा को पांच तथा बसपा को दस सीटों पर संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में राज्य के कुल मत प्रतिशत में भाजपा का हिस्सा 49.56 फीसदी रहा जो वर्ष 2014 की तुलना में करीब सात फीसदी अधिक है। दूसरी ओर पिछले चुनाव के मुकाबले एक और सीट का नुकसान झेलने वाली कांग्रेस का मत प्रतिशत भी कम हुआ। वर्ष 2014 में मिले राज्य की साढे सात फीसदी जनता ने देश की सबसे पुरानी पार्टी पर अपना भरोसा जताया था जो इस बार कम होकर 6.31 रह गया। मोदी की अगुवाई वाली भाजपा को केन्द्र में दोबारा आने से रोकने के लिये विचारधारा से समझौता करने वाली सपा- बसपा की दोस्ती भी लोगों को रास नहीं आयी जिसके चलते सपा की कुल मत प्रतिशत में भागीदारी जहां साढे चार फीसदी कम हुयी वहीं बसपा को भी करीब ढाई प्रतिशत का नुकसान हुआ। वर्ष 2014 में बसपा की हिस्सेदारी 22 फीसदी थी जो इस बार घटकर 19.26 प्रतिशत रह गयी। इसी तरह सपा 22.3 प्रतिशत से लुढक कर 17.96 फीसदी पर टिक गई। यहां दिलचस्प है कि वर्ष 2014 के चुनाव में खाता खोलने से वंचित रही बसपा को इस बार दस सीटों का फायदा हुआ है जबकि सपा पिछली बार की तरह पांच सीटों पर टिकी है। गठबंधन के बावजूद सपा को अपने दो मजबूत किलों बदायूं और कन्नौज से हाथ धोना पड़ा है। इसी तरह पिछले चुनाव में दो सीटों पर सिमटी कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी को इस बार गांधी परिवार के अजेय दुर्ग अमेठी को गंवाना पड़ा। वर्ष 2014 में हार झेलने वाली भाजपा की स्मृति ईरानी की दढ इच्छाशक्ति और मोदी की लोकप्रियता ने कांग्रेस का किला आखिरकार ढहा दिया। गठबंधन के सहारे अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ने वाले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का सूबे में कुल मत प्रतिशत में एक दशमलव 67 रहा। किसान राजनीति की बदौलत केन्द्र की राजनीति में खासा दखल देने वाली यह पार्टी वर्ष 2014 की तरह इस बार भी खाता खोलने से वंचित रही। रालोद को गठबंधन के तहत तीन सीटें मिली थी।

चुनाव परिणामों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, उनकी सरकार के पिछले पांच साल के कार्यों और चुनाव प्रचार अभियान का नतीजा माना जा रहा है। चुनाव प्रचार राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रवाद और हिदुत्व के इर्द-गिर्द रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार कांग्रेस पार्टी पर वंशवादी राजनीति को लेकर निशाना साधा। विपक्ष ने भाजपा पर ध्रुवीकरण और बांटने वाली राजनीति के आरोप लगाते हुए हमला बोला। मतगणना के रुझानों के अनुसार, मोदी लहर के साथ-साथ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की चुनावी रणनीति ने भौगोलिक और जातीय, उम्र, लिग जैसे समीकरणों को मात देते हुए विपक्ष का सफाया किया है। मतगणना के रूझानों में बढ़त के साथ-साथ देशभर में भाजपा के दफ्तरों पर उत्सव का माहौल हो गया। ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते कार्यकर्ताओं ने अपनी खुशी का इजहार शुरू कर दिया है। मतगणना के रुझान एग्जिट पोल के पूर्वानुमानों से काफी मिलते जुलते हैं जिनमें राजग को दूसरी बार केंद्र में सत्ता पर काबिज होते दिखाया गया था। वर्ष 2014 में भाजपा ने 282 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि कांग्रेस अपने सर्वकालिक न्यूनतम आंकड़े 44 सीटों पर सिमट गयी थी। कांग्रेस ने 2009 में 206 सीटें जीती थी।

उल्लेखनीय है कि इस चुनाव में पंजीकृत 90.99 करोड़ मतदाताओं में से करीब 67.11 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। भारतीय संसदीय चुनाव में यह अब तक का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत है। लोकसभा चुनाव में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के परिणामों का मिलान पेपर ट्रेल मशीनों से निकलने वाली पर्चियों से किया गया। यह मिलान प्रति विधानसभा क्षेत्र में पांच मतदान केंद्रों में हुआ। मतगणना से एक दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हिंसा की आशंका के मद्देनजर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अलर्ट कर दिया। मंत्रालय ने नतीजों के बाद हिंसा की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया। उल्लेखनीय है इस बार सात चरणों में लोकसभा की 543 सीटों में से 542 सीटों पर मतदान हुआ था। तमिलनाडु की वेल्लोर सीट पर धनबल के भारी पैमाने पर इस्तेमाल की शिकायतों के आधार पर आयोग ने इस सीट पर अनिश्चित काल के लिये मतदान स्थगित कर दिया था।

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