बेहतर तैयारी ने कुचल दिया फोनी का फन, संयुक्त राष्ट ने भी की आपदा प्रबंधन और बचाव की तारीफ

नई दिल्ली/ भीषण चक्रवाती तूफान फोनी के प्रकोप का सामना करने वाले भारत ने आपदा प्रबंधन और बेहतर बचाव की तैयारी से जान—माल के संभावित नुकसान को न्यूनतम स्तर पर रख कर समूचे विश्व को चौंका दिया है। केन्द्र सरकार और प्रभावित राज्यों के स्थानीय प्रशासन ने अपनी बेहतर प्लानिंग से जनहानि को कई गुना कम करके पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि विनाशकारी चक्रवाती तूफानों से कैसे निपटा जाए। प्रचंड वेग के साथ तांडव व तबाही मचाने के इरादे से भारत की धरती पर कदम रखनेवाले फोनी तूफान का जिस कुशलता से फन कुचल दिया गया उसकी संयुक्त राष्ट्र ने भी जमकर तारीफ की है।

आपदा के खतरे में कमी लाने वाली यूएन की एजेंसी ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की फोनी के बारे में सटीक चेतावनी की जमकर तारीफ की है। डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (आपदा के खतरे में कमी) फॉर यूनाइटेड नेशंस सेक्रटरी जनरल की विशेष प्रतिनिधि और जिनेवा स्थित यूएन ऑफिस फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (UNISDR) की हेड मामी मिजोटरी ने कहा कि भारत का कम से कम नुकसान के दृष्टिकोण ने तबाही में काफी कमी ला पाने में सफलता पाई। बता दें कि सही समय पर चेतावनी के कारण भयंकर चक्रवाती तूफान फोनी में जनहानि काफी कम हुई। एक्सपर्ट की मानें तो यह एक अद्भुत उपलब्धि है।

शुक्रवार को आया तूफान फोनी भी दुनियाभर में भारी नुकसान करने वाले चक्रवाती तूफानों जैसा ही था, मगर बेहतर प्लानिंग की वजह से भारत ने जानमाल के नुकसान को बहुत हद तक कम कर दिया। आमतौर पर फोनी जैसे भीषण तूफान सैकड़ों लोगों की जान लेता रहा है। इससे पहले 1999 में ओडिशा में आए सुपर साइक्लोन से 10 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। लेकिन इस बार मौत का आंकड़ा 12 तक ही सिमट कर रह गया। ओडिशा के विशेष राहत आयुक्त विष्णुपद सेठी ने कहा, ”हम इसको लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध रहे कि तूफान में एक भी आदमी की जान नहीं जानी चाहिए। यह एक दिन या एक महीने भर का काम नहीं है, बल्कि इसमें हमने पिछले 20 साल खपाए हैं।”

वाकई इस बार तूफान से निपटने के लिये अभूतपूर्व तैयारियां की गई थीं। सरकार ने लोगों को सचेत करने में और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में अपनी पूरी मशीनरी झोंक दी। तूफान से पहले करीब 26 लाख टेक्स्ट मैसेज भेजे गए, 43 हजार वॉलंटियर्स, 1000 आपातकालीन कर्मी, टीवी पर विज्ञापन, तटीय इलाकों में लगे साइरन, बसें, पुलिस अधिकारी और सार्वजनिक घोषणा जैसे तमाम उपाय किये गये। जब फोनी तूफान ओडिशा के तटीय इलाकों से टकराया उस दौरान 220 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही थीं। बस, कार, क्रेन, पेड़ कुछ भी तूफान के आगे नहीं टिक पा रहा था।

तूफान के बाद तबाही के मंजर की तस्वीरें देखकर दिल दहल जाए, लेकिन जिस तरह की तबाही हो सकती थी उसके मुकाबले जान—माल का ना के बराबर ही नुकसान हुआ। तूफान से जो जो इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते थे, वहां के लोगों को समय रहते ही वहां से निकाल लिया गया। फोनी तूफान आने से पहले ओडिशा में स्थानीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और एनडीआरएफ की टीमें सक्रिय हो गई थीं। एनडीआरएफ ने तूफान से निपटने की लिए 65 टीमें उतारी थीं, जो इसकी किसी क्षेत्र में अभी तक की सबसे बड़ी तैनाती है। एक टीम में 45 लोग शामिल थे। पिछले तीन दिनों में ओडिशा, आंध्र प्रदेश और सड़कें दुरुस्त करने, कानून-व्यवस्था और भोजन की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त टीमें लगाई गईं। फोनी से निपटने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी थी। पुरी के गोपालपुर में सेना की तीन टुकड़ियां स्टैंडबाय पर थीं और पनागर में इंजिनियरिंग टास्क फोर्स थी। नौसेना ने राहत कार्यों के लिए 6 जहाजों को तैनात किया, जबकि मेडिकल और डाइविंग टीम अलर्ट पर थीं। इसके अलावा भारतीय वायुसेना ने दो सी -17, दो सी-130 और चार एएन-32 को स्टैंडबाय पर रखा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 मई को फोनी तूफान के मद्देनजर उत्पन्न स्थिति का जायजा लेने के लिए ओडिशा जाएंगे। पीएम मोदी ने चक्रवात फोनी के बाद मौजूदा स्थिति पर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से बात की। चक्रवात के मद्देनजर केन्द्र सरकार से निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि संपूर्ण राष्ट्र विभिन्न भागों में चक्रवात से प्रभावित सभी लोगों के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है।

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