सिलसिलेवार धमाकों के बाद श्रीलंका में आपातकाल की घोषणा, अब तक 24 गिरफ्तार

कोलंबो/ श्रीलंका में रविवार को ईस्टर के मौके पर चर्च व पांच सितारा होटलों में हुए 8 सिलसिलेवार धमाकों के आलोक में सोमवार की आधी रात से आपातकाल लगाया जाएगा, जिससे सुरक्षाबलों की आतंकवाद निरोधक शक्तियां बढ़ेंगी। इन धमाकों में 290 लोगों की मौत हो गयी और 500 से अधिक अन्य घायल हो गये। राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) की एक बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया। राष्ट्रपति की मीडिया इकाई के बयान के अनुसार एनएससी ने आधीरात से सशर्त आपातकाल लगाने का निर्णय लिया है। बयान के अनुसार यह उपाय आतंकवाद को निशाना बनाने के लिए उठाया गया है, इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बाधित नहीं होगी। सरकार ने मंगलवार को राष्ट्रीय शोक दिवस की घोषणा की है। साथ ही श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना ने आंतकी हमलो की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष समिति बनाये जाने की घोषणा की है। समिति से दो सप्ताह के अंदर रिपोर्ट देने को कहा गया है।

उधर कोलंबो के मुख्य एयरपोर्ट के पास एक और जिंदा बम मिला है। श्रीलंका एयर फोर्स ने इस बम को सफलतापूर्वक डिफ्यूज कर दिया है। यह जानकारी स्थानीय पुलिस ने दी है। पुलिस ने इन धमाकों के सिलसिले कोलंबो से 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि पुलिस ने गिरफ्तार लोगों की पहचान अभी तक उजागर नहीं की है। पुलिस ने कोलंबो में उस घर का भी पता लगा लिया है जहां आत्मघाती हमलावर पिछले तीन महीने से रह रहे थे। इन धमाकों को पिछले एक दशक का सबसे खतरनाक हमला माना जा रहा है। हमले के बाद तलाशी और जांच अभियान में सोमवार सुबह कोलंबो में भंडारनायके अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के डिपार्चर टर्मिनल की ओर जाने वाले रास्ते पर छह फुट का पाइप बम मिला। श्रीलंकाई वायुसेना ने बताया कि बम को सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज कर दिया गया। कोलंबो में ही सेंट्रल बस स्टेशन के पास से 87 बम डेटोनेटर बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक 12 बम मैदान में पड़े मिले। तलाशी के दौरान 75 और बम मिले।

ईसाइयों के पर्व ईस्टर के मौके पर विभिन्न चर्च और पांच सितारा होटलों को निशाना बनाकर किए गए एक के बाद एक आठ धमाके हुए जिसमें मरने वालों का आंकड़ा 290 पहुंच गया है, जबकि 500 लोग घायल हुए हैं। मरने वालों में 27 विदेशी हैं, जिसमें आठ भारतीय शामिल हैं। कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने इस बम-विस्फोट में आठ भारतीयों के अभी तक मारे जाने की सूचना की पुष्टि कर दी। इसके अलावा तकरीबन दस भारतीयों के गायब होने की सूचना भी मिल रही है। अधिकारियों ने बताया कि कोलंबो, बट्टीकलोआ व नेगोंबो में तीन चर्च व तीन होटलों में हुए धमाकों में मरने वालों में आठ भारतीयों में पांच जदएस के कार्यकर्ता थे। इनके नाम नारायण चंद्रा, केजी हनुमनतरैयप्पा, एम. रंगप्पा, केएम लक्ष्मीनारायण और लक्ष्मण गौड़ा रमेश बताए गए हैं। पार्टी के दो कार्यकर्ता लापता बताए जा रहे हैं। सभी कार्यकर्ता कोलंबो स्थित सांगरी ला होटल में रुके थे। इससे पहले रविवार रात विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तीन अन्य भारतीयों रमेश, लक्ष्मी और नारायण चंद्रशेखर की मौत की जानकारी दी थी।

अभी तक इन हमलों की किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस ने इस सिलसिले में 24 लोगों को गिरफ्तार किया है। उनको आगे की तफ्तीश के लिए सीआईडी के हवाले किया गया है। सरकारी विश्लेषक विभाग ने दावा किया है कि इन सिलसिलेवार बम धमाकों को सात आत्मघाती हमलावरों ने अंजाम दिया था। सभी हमलावर श्रीलंकाई नागरिक बताए जा रहे हैं। कैबिनेट प्रवक्ता व स्वास्थ्य मंत्री रजित सेनारत्ने ने बताया कि हमले में स्थानीय मुस्लिम संगठन नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) का हाथ हो सकता है लेकिन किसी अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क की मदद के बिना इतना बड़ा हमला संभव नहीं। प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि सरकार को ऐसे हमलों के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी। यह पता लगाया जाएगा कि पर्याप्त सतर्कता क्यों नहीं बरती गई। एक बयान में श्री विक्रमसिंघे ने कहा कि स्थानीय संदिग्धों के नाम सामने आए हैं लेकिन इनके बाहरी सम्पर्कों के बारे में पता लगाया जाएगा।

इंटरपोल ने कहा है कि वह श्रीलंका में ईस्टर समारोह के समय गिरजाघरों और महंगे होटलों में हुये सिलसिलेवार आठ बम धमाकों की जांच के लिए इस देश की सरकार के साथ पूरा सहयोग करने को तैयार है। इंटरपोल के महासचिव जुर्गेन स्टोक ने ट्विटर पर जारी संदेश में कहा, ‘‘इंटरपोल इस भयावह हमले की कड़ी निंदा करता है और राष्ट्रीय अधिकरणों के द्वारा की जा रही जांच में अपना पूर्ण सहयोग देने का प्रस्ताव करता है।’’ पेरिस में इस संगठन का मुख्यालय है और यह विश्व स्तर पर पुलिस सहयोग की सुविधा मुहैया कराता है। स्टॉक ने कहा कि इंटरपोल, सदस्य देश के निवदेन पर एक दुर्घटना प्रत्युत्तर दल तैनात कर सकता है ताकि निर्दिष्ट जगह पर संकट का हल निकालने की दिशा में मदद हो सके। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सहानुभूति एवं प्रार्थनाएं पीड़ित परिजनों एवं उनके मित्रों के लिए हैं।’’

श्रीलंका में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका के पुलिस प्रमुख ने 10 दिन पहले ही इनपुट दिया था कि देश में बम धमाकों के जरिए बड़े हमले हो सकते हैं। अलर्ट में कहा गया था कि फिदायीन हमलावर देश के प्रमुख चर्चों को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं। खुफिया रिपोर्ट की मानें तो कोलंबो में भारतीय उच्चायोग भी हमलावरों के निशाने पर था। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस प्रमुख पुजुथ जयसुंदर ने 11 अप्रैल को ही देश के आला अधिकारियों को इनपुट भेजा था जिसमें ऐसे हमलों की आशंका जताई गई थी। उक्त अलर्ट में एक विदेशी इंटेलीजेंस एजेंसी का भी इनपुट जोड़ा गया था। ताजा इनपुट में कहा गया था कि नेशनल तौहीत जमात (एनटीजे) नामक संगठन श्रीलंका के अहम गिरजाघरों को निशाना बनाने की ताक में है। यही नहीं ऐसे हमलों के निशाने पर भारतीय दूतावास भी है। बता दें कि नेशनल तौहीत जमात एक चरमपंथी संगठन है। श्रीलंका में पिछले साल बौद्ध प्रतिमाओं के विध्वंस की घटनाओं में भी इस संगठन का नाम सामने आया था।

विश्व नेताओं ने श्रीलंका में विस्फोटों की कड़ी निंदा की है। ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे, अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन, जर्मनी के राष्ट्रपति, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रूट्टे, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन, न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा एरडर्न सहित अनेक नेताओं ने कहा है कि वे संकट की इस घड़ी में श्रीलंका के साथ हैं। येरूशलम के कैथोलिक चर्च और पोप फ्रांसिस ने भी हमले की निंदा की है। संयुक्त अरब अमारात, तुर्की, बहरीन, कतर, पाकिस्तान और बांग्लादेश के नेताओं ने भी इस हमले को निंदनीय बताया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे से बात की है और हमलों में मारे गए निर्दोष लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की है। श्री मोदी ने टेलिफोन पर बातचीत में श्रीलंका को हरसंभव मदद की पेशकश की। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने श्रीलंका में धमाकों के बाद वहां के विदेश मंत्री तिलक मारापना से बात की। श्रीमती स्वराज ने कहा कि भारत इस कठिन घड़ी में श्रीलंका को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो भारत से चिकित्सा दल भी भेजे जाएंगे।

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