परम्परा, परिवार और प्रकृति प्रेम का पाठ पढ़ाता वटसावित्री...

भारत को पर्व त्योहारों का देश माना गया है। भारत में मनाये जाने वाले प्रत्येक पर्व या त्योहार का कोई एक पक्ष नहीं रहता है। हर पर्व के पीछे इतिहास की ही कहानी नहीं होती है, बल्कि प्रकृति के संरक्षण, जी...

महाभारत : शकुनी और उसके पासे का रहस्य !!...

महाभारत का सबसे प्रमुख पात्र होने के बावजूद शकुनि की कहानी को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है। शायद कोई भी व्यक्ति इस बात को नकार नहीं सकता कि अगर महाभारत में शकुनि ना होता तो इतिहास कुछ और ही होता। शकुन...

‘राष्ट्र-धर्म’ का सजग प्रहरी- वीरव्रती खालसा पंथ...

वैशाखी पर्व भारत के उन राष्ट्रीय पर्वों में से एक है जिनका सम्बन्ध राष्ट्र के सुरक्षा और स्वतंत्रता के साथ है। नई फसल के स्वागत के साथ ग्रीष्म काल के अभिनन्दन के रूप में हर्षोल्लास से मनाये जाने वाले...

अष्टावक्र गीता : अध्यात्म विज्ञान का बेजोड़ ग्रन्थ...

अष्टावक्र गीता अध्यात्म विज्ञान का बेजोड़ ग्रन्थ है। ज्ञान कैसे प्राप्त होता है? मुक्ति कैसे होगी? और वैराग्य कैसे प्राप्त होगा? ये तीन शाश्वत प्रश्न हैं जो हर काल में आत्मानुसंधानियो द्वारा पूछे जात...

ऋषि अष्टावक्र— इतिहास के सबसे बड़े महाज्ञानी, जिन्होंने जनक को बना दिय...

अष्टावक्र आठ अंगों से टेढ़े-मेढ़े पैदा होने वाले ऋषि थे। शरीर से जितने विचित्र थे, ज्ञान से उतने ही विलक्षण। उनके पिता कहोड़ ऋषि थे जो उछालक के शिष्य थे और उनके दामाद भी। कहोड़ अपनी पत्नी सुजाता के स...

शारदापीठ कॉरिडोर खोलने के लिए पाकिस्तान सरकार सहमत !...

नई दिल्ली/ करतारपुर कॉरिडोर खोलने के मामले को लेकर तमाम तरह की अड़चने व पाबंदियां सामने रख रही पाकिस्तान सरकार ने अब शारदापीठ कॉरिडोर के लिए हरी झंडी दे दी है। पाकिस्तान की मीडिया के हवाले से सामने आ...

प्रयागराज कुंभ में 24 करोड़ लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी, कई रिकार्ड ह...

नई दिल्ली/ लगभग दो महीने तक आयोजित प्रयागराज कुंभ का महाशिवरात्रि पर छठे स्नान पर्व के साथ सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, देश के केन्द्रीय मंत्री, राज्यप...

तंत्र: पात्रता के अभाव में साधना के दुष्परिणाम...

वास्तव में तंत्र भी विज्ञान जैसा ही है। विकास और विनाश, दोनों करने का सामर्थ्य तंत्र में भी है, और विज्ञान में भी। बेशक ! तंत्र बहुत ही लाभदायक सिद्ध हो सकता है किन्तु उसकी सही विधि व्यवस्था को समझे ...

तंत्र साधकों के लिये अनिवार्य है विकारों से मुक्त होना...

तंत्र विद्या का अनुसरण करना तलवार की धार पर चलने के समान है जिसके लिए साधक का पुरुषार्थी, साहसी, दृढ़ संकल्प, निर्भय और धैर्यवान होना अनिवार्य रूप से आवश्यक है। तांत्रिक साधना एक प्रकार का आक्रमण है ज...

आर्यसमाज की 150 वीं वर्षगांठ का लक्ष्य व उसकी पूर्ति के उपाय...

वर्ष प्रतिपदा के पावन दिवस 10 अप्रैल, सन् 1875 को महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य-समाज ने अब तक देश के धार्मिक, सामाजिक, आध्यात्मिक व राष्ट्रीय विषयों पर अपनी गहरी पैठ बनाई है. इसके द्वारा ...