5 साल बाद सूरत में फिर लगेगा राष्ट्रीय पुस्तक मेला, जनवरी के अंत में यूनिवर्सिटी ग्राउंड पर आयोजन

सूरत : कोरोना काल के बाद लगभग भुला दिया गया सूरत का प्रतिष्ठित पुस्तक मेला एक बार फिर लौटने जा रहा है। करीब 5 साल के लंबे अंतराल के बाद नगर निगम ने जनवरी के अंत में यूनिवर्सिटी ग्राउंड पर पुस्तक मेले के आयोजन की तैयारी शुरू कर दी है। यह वही मेला है, जिसकी शुरुआत देश में सबसे पहले सूरत मनपा ने की थी।

वर्ष 2000 से लगातार आयोजित होने वाला यह पुस्तक मेला 2020 में कोरोना महामारी के बाद बंद हो गया था। इसके बाद नगर निगम की ओर से इसे दोबारा शुरू करने के कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। इससे पुस्तक प्रेमियों में भारी नाराजगी देखी गई थी और मेयर तक शिकायतें भी पहुंची थीं। पुस्तक मेला बंद होने से सूरत की सांस्कृतिक पहचान को भी झटका लगा। जहां सूरत ने इस आयोजन की परंपरा शुरू की थी, वहीं अहमदाबाद सहित अन्य शहरों ने इसे आगे बढ़ाकर एक मजबूत पहचान बना ली। अब सूरत मनपा प्रशासन की नींद टूटी है और पांच साल के ब्रेक के बाद फिर से पुस्तक मेले के आयोजन की तैयारी शुरू कर दी है।

– पिछली बार 50 लाख की हुई थी आय

पुस्तक मेले की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंतिम आयोजन में नगर निगम को करीब 50 लाख रुपए की आय हुई थी। बावजूद इसके, मेला बंद रहना कई सवाल खड़े करता रहा।

– पुस्तक मेले के साथ होंगे कई बड़े आयोजन

मेयर दक्षेश मावाणी ने जानकारी दी कि पुस्तक मेले के साथ-साथ फ्लावर शो, हॉर्टिकल्चर मेला, फूड फेस्टिवल, शिल्पग्राम मेला, फनफेयर जैसे कई बड़े आयोजन भी किए जाएंगे। पहले यह आयोजन वनिता विश्राम ग्राउंड पर होता था, लेकिन इस बार इसे यूनिवर्सिटी ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा।

राज्य सरकार और मनपा मिलकर वहन करेंगे खर्च

मेयर दक्षेश मांवानी के मुताबिक, इस पूरे आयोजन का खर्च राज्य सरकार और सूरत नगर निगम संयुक्त रूप से वहन करेंगे। आगामी चुनावों से पहले इस फैसले को सांस्कृतिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

अब देखना यह होगा कि 5 साल बाद लौट रहा यह पुस्तक मेला एक बार फिर सूरत की पहचान को नई ऊंचाई देता है या नहीं

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