इंदौर–गांधीनगर की घटनाओं से सबक: सूरत का स्वास्थ्य तंत्र अलर्ट मोड में

सूरत. देश में स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष स्थान पर रहने वाले सूरत और इंदौर की छवि पर हालिया घटनाओं ने सवाल खड़े कर दिए हैं। इंदौर में गंदे पानी से 100 से अधिक लोगों के बीमार पड़ने और गांधीनगर की स्थिति को देखते हुए सूरत महानगरपालिका का स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। किसी भी संभावित जलजनित रोग के फैलाव को रोकने के लिए निगम ने शहरभर में व्यापक निगरानी और जांच अभियान शुरू कर दिया है।

नगर निगम ने सर्वे कर शहर के अलग-अलग इलाकों में गंदे पानी की समस्या वाले करीब 120 हॉटस्पॉट चिन्हित किए हैं। इन इलाकों में पानी से फैलने वाली बीमारियों का खतरा अधिक माना जा रहा है। इसी को देखते हुए पानी के सैंपल लेने और उनकी लैब जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

अब तक हर माह करीब 10 हजार सैंपलों की जांच होती थी, जिसे बढ़ाकर 15 हजार किया गया है। दैनिक स्तर पर सैंपल की संख्या 300 से बढ़ाकर 500 कर दी गई है, ताकि दूषित स्रोत समय रहते पकड़े जा सकें।

आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। वर्ष 2025 में लिए गए 1.29 लाख से अधिक सैंपलों में 4,959 सैंपल फेल पाए गए। रोजाना करीब 1200 एमएलडी पानी की आपूर्ति के बावजूद गुणवत्ता बनाए रखना निगम के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

गर्मी शुरू होते ही तापी नदी के जलस्तर में गिरावट से सिंगणपोर–रांदेर वियर क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। जलस्तर घटने से बैक्टीरिया बढ़ते हैं और घरों तक पहुंचने वाले पानी में दुर्गंध की शिकायतें सामने आती हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निगम आयुक्त व मेयर की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें बार-बार शिकायत वाले इलाकों में पुरानी जल लाइनों को बदलने और हाइड्रोलिक व स्वास्थ्य विभाग को संयुक्त रूप से कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

खासतौर पर सेंट्रल और लिंबायत जोन में पुरानी लाइनों और लीकेज के कारण सीवर का पानी पेयजल में मिलने का खतरा सबसे ज्यादा है। निगम का कहना है कि स्वच्छता में नंबर वन होना गर्व की बात है, लेकिन नागरिकों को शुद्ध पानी देना पहली जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ ‘प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर’ के मंत्र पर काम किया जा रहा है, ताकि सूरत में इंदौर जैसी स्थिति न बने।

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