डेंगू मरीज को भर्ती करना जरूरी नहीं बताकर क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी को पड़ा भारी

सूरत. डेंगू जैसे गंभीर रोग में मरीज को अस्पताल में भर्ती करना जरूरी नहीं है, यह तर्क देकर बीमा क्लेम खारिज करने वाली बीमा कंपनी को ग्राहक सुरक्षा कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने इसे सेवा में कमी और अनैतिक व्यापार व्यवहार मानते हुए बीमा कंपनी को इलाज का पूरा खर्च ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है।

मामले के अनुसार, किशोरभाई विराणी ने वर्ष 2022 में आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी की हेल्थ पॉलिसी ली थी। वर्ष 2023 में उनके पुत्र को डेंगू होने पर उसे निजी अस्पताल में भर्ती कर उपचार कराया गया। इलाज पूरा होने के बाद विराणी ने बीमा कंपनी में क्लेम प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए दावा नामंजूर कर दिया कि डेंगू मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं थी और उपचार ओपीडी आधार पर किया जा सकता था। बीमा कंपनी के रवैए के खिलाफ किशोरभाई विराणी ने अधिवक्ता पवन यादव के जरिए ग्राहक सुरक्षा कोर्ट में बीमा कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और पाया कि मरीज की डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव थी तथा वह 24 घंटे से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहा था। ऐसे में केवल यह कहकर कि भर्ती जरूरी नहीं थी, बीमा दावा खारिज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी का रवैया सेवा में कमी और अनैतिक व्यापार पद्धति की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर कोर्ट ने इलाज पर हुए खर्च की राशि ब्याज सहित किशोरभाई विराणी को भुगतान करने का आदेश दिया।

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