रायपुर (छत्तीसगढ़), 27 दिसंबर 2025 ! छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार ने माओवादियों से हिंसा और बंदूक की भाषा छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने बार-बार माओवादियों से हिंसा और गोलीबारी की भाषा छोड़कर विकास की मुख्यधारा में आने की अपील की है। सरकार उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार करेगी और इसके परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। हमने एक अच्छी पुनर्वास नीति बनाई है और आज दो हजार से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। सरकार उनके साथ अच्छा व्यवहार कर रही है।”
उन्होंने आगे बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है और उन्हें हर महीने 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, नई पुनर्वास नीति में खेती के लिए भूमि उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में मकान निर्माण के लिए भूमि देने का भी प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में सरकार का उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वालों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वालों के भविष्य को लेकर चिंतित है और उनके कल्याण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
इससे पहले, छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में 34 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। बीजापुर पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादी कैडरों पर कुल मिलाकर 84 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार की पुनर्वास पहल ‘पूना मरघम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ (मुख्यधारा में वापसी: पुनर्वास के माध्यम से सामाजिक पुनःएकीकरण) के तहत हुआ। इस पहल का उद्देश्य पूर्व उग्रवादियों को समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल करना और कल्याणकारी उपायों के माध्यम से उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना है।
अधिकारियों ने बताया कि यह कदम निरंतर चल रही नक्सल विरोधी नीतियों और विश्वास-निर्माण प्रयासों के संयुक्त प्रभाव को दर्शाता है।
इस बीच, केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।