
केजरीवाल, सिसोदिया ने ‘फाँसीघर’ विवाद में जारी विशेषाधिकार समिति के समन को दिल्ली हाई कोर्ट में दी चुनौती !
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति द्वारा जारी समन को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। यह समन विधानसभा परिसर में स्थित ‘फाँसी-घर’ (Execution Chamber) के नवीनीकरण के लिए फंड के कथित दुरुपयोग के मामले से संबंधित था।
नयी दिल्ली, 11 नवंबर 2025 ! दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति द्वारा जारी समन को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। यह समन विधानसभा परिसर में स्थित ‘फाँसी-घर’ (Execution Chamber) के नवीनीकरण के लिए फंड के कथित दुरुपयोग के मामले से संबंधित था।
यह याचिका मंगलवार को न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की अदालत में सूचीबद्ध है। आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं ने विशेषाधिकार समिति द्वारा जारी समन को रद्द करने के लिए यह याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि वर्तमान विशेषाधिकार समिति किसी भी मुद्दे पर पिछली समिति के सदस्यों को तलब नहीं कर सकती। समिति कथित रूप से नवीनीकरण के लिए फंड के दुरुपयोग की जाँच कर रही है।
दिल्ली विधानसभा में यह सीक्रेट फाँसी-घर, जोकि विधानसभा भवन के बेसमेंट (तहखाने) में एक विशेष कक्ष है जिसे “हैंगिंग सेल” या फाँसी-घर कहा जाता है , एक विवादित विषय है। आम आदमी पार्टी (आप) के शासनकाल के दौरान 2022 में इसे फाँसी-घर घोषित किया गया था, जबकि भाजपा के नेतृत्व वाले वर्तमान शासन के अनुसार, यह एक \’टिफिन कक्ष\’ या पुरानी लिफ्ट है, जिसे अंग्रेजों के समय में इस्तेमाल किया जाता था। इस पर ऐतिहासिक दस्तावेजों की भिन्न व्याख्याओं के कारण काफी बहस हुई है।
आप सरकार का दावा था कि यह कमरा ब्रिटिश शासन के दौरान क्रांतिकारियों को गुप्त रूप से फाँसी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस पुनर्निर्मित कक्ष का उद्घाटन किया था और इसे फाँसी-घर के रूप में प्रचारित किया था। कुछ लोगों का यह भी दावा था कि यहाँ रस्सी और जूते जैसे सामान मिले थे, जो फाँसी के इस्तेमाल का संकेत दे सकते हैं।
फाँसी-घर के विरुद्ध दावा – वर्तमान दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने राष्ट्रीय अभिलेखागार से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर 1911-12 के विधानसभा भवन के नक्शे की जाँच की और पाया कि उसमें कोई फाँसी-घर नहीं था। इस दावे के अनुसार, यह कमरा असल में एक \ टिफिन रूम या सीढ़ी-घर था जिसका उपयोग सदस्यों के भोजन को ऊपर पहुँचाने के लिए रस्सी से लिफ्ट की तरह किया जाता था।
वर्तमान स्थिति यह है कि विवाद के बाद, इस कक्ष का नाम बदलकर \’टिफिन कक्ष\’ कर दिया गया है। इस मुद्दे पर दिल्ली विधानसभा में काफी राजनीतिक विवाद और बहस हुई है। वर्तमान में यह दावा है कि विधानसभा ने ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर कक्ष का सही नामकरण किया है।
अगस्त में, सदन में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद, दिल्ली विधानसभा के वर्तमान स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने विवादास्पद ‘फाँसी-घर’ मुद्दे पर जाँच के आदेश दे कर इसे विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया। अध्यक्ष गुप्ता ने कहा था, “सदन की भावना के आधार पर यह निर्णय लिया गया है कि इस ऐतिहासिक विधानसभा भवन को उसके मूल रूप में बहाल किया जाएगा।”
उन्होंने पिछली सरकार की कार्रवाई की आलोचना करते हुए उसे “इतिहास का गंभीर अपमान” और “एक बड़ा विचलन” बताया था। उन्होंने कहा था कि “फर्जी ‘फाँसी-घर और सुरंग के साथ ही विधानसभा भवन में बिना अनुमति किए गये बदलाव, जनभावनाओं के साथ धोखा हैं और सदन की गरिमा पर आघात हैं। इतिहास ऐसे कृत्यों को कभी माफ नहीं करेगा।”
अध्यक्ष ने आगे कहा, “9 अगस्त 2022 को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में केजरीवाल और सिसोदिया के नाम वाली एक पट्टिका ‘फाँसीघर’ के नाम पर लगाई गयी थी। सदन का निर्णय है कि इस पट्टिका को हटाया जाएगा।”
दिल्ली के मंत्री और भाजपा नेता परवेश वर्मा ने ब्रिटिश काल के इस “फाँसी-घर” का दौरा किया था और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर इतिहास के एक महत्वपूर्ण हिस्से को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने का आरोप लगाया था।
