मोहम्मद वाणिया: सुन नहीं सकते… लेकिन प्रतिभा की गूंज दुनिया तक पहुंची

सार्वजानिक यूनिवर्सिटी से मिले मज़बूत सहयोग की बदौलत SRKI इंस्टिट्यूट के छात्र मोहम्मद वाणिया ने टोक्यो ओलंपिक की एयर शूटिंग प्रतियोगिता में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत, गुजरात और सूरत का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन किया

सूरत: सूरत के युवा शूटर मोहम्मद वाणिया ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रतिभा और जज़्बे के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। सार्वजानिक यूनिवर्सिटी से संबद्ध SRKI इंस्टिट्यूट में BSC–IT के प्रथम वर्ष में पढ़ रहे मोहम्मद ने टोक्यो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक स्तर की प्रतियोगिता में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं और भारत,गुजरात और सूरत का नाम विश्व मंच पर रोशन किया है।

मोहम्मद जन्म से ही सुन नहीं सकते, लेकिन यह स्थायी चुनौती कभी भी उनके रास्ते की रुकावट नहीं बनी। बल्कि वही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बन गई। राइफल शूटिंग जैसे खेल में, जहां एकाग्रता और आत्म–नियंत्रण सबसे ज़रूरी हैं, वहां मोहम्मद ने धैर्य, मेहनत और समर्पण से दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

– प्रतिभा को अनुकूल माहौल देने में सार्वजानिक यूनिवर्सिटी की महत्वपूर्ण भूमिका

मोहम्मद की प्रतिभा का पता चलते ही सार्वजानिक यूनिवर्सिटी उनके साथ मज़बूती से खड़ी हो गई। यूनिवर्सिटी के प्रोवोस्ट डॉ. किरण पंड्या ने कहा कि
मोहम्मद जैसी प्रतिभा बहुत दुर्लभ होती है। उनकी सफलता के लिए यूनिवर्सिटी के सभी संसाधन उनके लिए पूरी तरह खुले रखे गए हैं। सिर्फ समर्थन ही नहीं, उनकी प्रेरक सफलता को सराहते हुए यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट आशिषभाई वकील ने बड़ी घोषणा की है कि SRKI इंस्टिट्यूट में जब तक मोहम्मद पढ़ाई करेंगे, उन्हें पूर्ण स्कॉलरशिप दी जाएगी।

– सालों की मेहनत, रोज़ 4–5 घंटे प्रैक्टिस

मोहम्मद बताते हैं कि वे पिछले चार वर्षों से लगातार मेहनत कर रहे थे। “मैं रोज़ चार से पांच घंटे एयर राइफल से प्रैक्टिस करता हूं। आखिरकार इस मेहनत का फल मेडल के रूप में मिला है। यह मेरे लिए सपने से भी बढ़कर है। श्रवण शक्ति न होने की चुनौती को उन्होंने कभी बहाना नहीं बनने दिया, बल्कि उसे अपनी ताकत में बदल दिया। उनकी पूरी क्षमता और एकाग्रता कई बार उन्हें अन्य प्रतिस्पर्धियों से आगे ले गई।

– सूरत का गौरव मोहम्मद वाणिया युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत

मोहम्मद की सफलता केवल मेडल तक सीमित नहीं है। बल्कि यह संदेश है कि कोई कमजोरी किसी को रोक नहीं सकती… यदि इच्छा मजबूत हो तो दुनिया भी कदमों में झुकती है। सूरत के इस युवा शूटर ने विश्व मंच पर जो चमक बिखेरी है, वह आने वाले डैफ एथलीट्स और उभरते खिलाड़ियों के लिए नई प्रेरणा बन रही है।