सीईसी और चुनाव आयुक्तों को दी गई प्रतिरक्षा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र और ईसी को नोटिस !

नई दिल्ली, 13 जनवरी 2026 !  गैर-सरकारी संगठन ‘लोक प्रहरी’  द्वारा दायर की गई एक याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया। हालाँकि अदालत ने संबंधित प्रावधान पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

इस याचिका में 2023 के सीईसी अधिनियम की धारा 16 को चुनौती दी गई है जिसके अंतर्गत  मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों को उल्लिखित  “मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं कार्यकाल) अधिनियम, 2023 ” द्वारा प्रतिरक्षा (immunity) का प्रावधान है, जो यह प्रतिरक्षा देता है कि CEC और चुनाव आयुक्तों के खिलाफ उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से जुड़े कार्यों के लिए कोई दीवानी (civil) या फौजदारी (criminal) कार्यवाही नहीं की जा सकती, जब तक कि कानून विशेष रूप से अनुमति न दे।

याचिका में तर्क दिया गया है कि यह धारा मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को “अभूतपूर्व और निरंकुश शक्तियाँ” प्रदान करती है तथा उन्हें स्थायी और व्यापक प्रतिरक्षा देती है। याचिका के अनुसार, यह प्रतिरक्षा नागरिक और आपराधिक दोनों प्रकार की कार्यवाहियों से सुरक्षा देती है, यहाँ  तक कि पद के कथित दुरुपयोग के मामलों में भी, यानि यदि पद का दुरुपयोग भी हो, तो उनके खिलाफ मुकदमा चलाना लगभग असंभव हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे की जॉंच करने पर सहमति जताकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है लेकिन फिलहाल धारा 16 पर रोक नहीं लगाई है।

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