
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच वार्ता बिना किसी समझौते के बंद !
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच इस्तांबुल में चार दिनों तक चली वार्ताएँ किसी भी समझौते के बिना समाप्त हो गयीं। यह दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका है।
इस्तांबुल (तुर्की), 29 अक्टूबर 2025 ! अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच इस्तांबुल में चार दिनों तक चली वार्ताएँ किसी भी समझौते के बिना समाप्त हो गयीं। यह दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका है।
अफगान न्यूज़ चैनल टोलो न्यूज से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अफगानिस्तान ने इस प्रतिबद्धता को दोहराया कि उसकी ज़मीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन उसने यह भी मांग की कि पाकिस्तान अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन बंद करे और अफगान सीमाओं के भीतर अमेरिकी ड्रोन अभियानों को रोके।
हालाँकि, सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने इन शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। बताया गया कि प्रमुख मांगों पर मतभेद के चलते पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता से बाहर निकल गया, जिसके बाद बातचीत रुक गयी।
गतिरोध पर टिप्पणी करते हुए, फ्रांस में अफगानिस्तान के पूर्व राजदूत उमर समद ने पाकिस्तान की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा, “ये पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान वास्तव में क्या चाहता है ?” क्या पाकिस्तान वास्तव में व्यावहारिक समाधान चाहता था या वह केवल ऐसा दिखाना चाहता था कि वह मुद्दों का समाधान चाहता है?”
गतिरोध और गहराता गया जब इस्लामाबाद ने, कथित तौर पर, काबुल से आग्रह किया कि वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को एक आतंकी संगठन के रूप में औपचारिक रूप से घोषित करे और उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई करे।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि “पाकिस्तान और अन्य देश आतंकवाद के लेबल का इस्तेमाल अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ करते हैं,” टोलो न्यूज ने रिपोर्ट किया।
इस्तांबुल वार्ता से पहले, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने चेतावनी दी थी कि यदि बातचीत से परिणाम नहीं निकले तो इस्लामाबाद सैन्य कार्रवाई का सहारा ले सकता है। इसके विपरीत, अफगानिस्तान ने जोर देकर कहा कि वह विवादों को राजनयिक माध्यमों से सुलझाने के प्रति प्रतिबद्ध है।
मोहम्मद नबी ओमारी, इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रथम उप मंत्री ने काबुल की स्थिति दोहराते हुए कहा, “उच्चतम स्तर से लेकर निम्नतम स्तर तक, इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान की नीति हस्तक्षेप न करने की है और वह अन्य देशों के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देता।”
इस्तांबुल वार्ता कतर और तुर्की की मध्यस्थता में हुई अस्थायी संघर्षविराम के बाद आयोजित की गयी थी। इससे पहले इस महीने पाकिस्तान ने कथित रूप से अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था, जिसके बाद काबुल की ओर से जवाबी कार्रवाई हुई।
17 अक्टूबर से शुरू हुई यह नवीनतम दौर की बातचीत किसी ठोस प्रगति के बिना समाप्त हो गयी है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की उम्मीदों को झटका लगा है।
