सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार की पिछड़ा वर्ग को ४२ % आरक्षण की याचिका कर दी ख़ारिज !

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तेलंगाना सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़ा वर्ग (Backward Class) के लिए 42% आरक्षण पर रोक लगायी गयी थी।

नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर 2025 ! सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तेलंगाना सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़ा वर्ग (Backward Class) के लिए 42% आरक्षण पर रोक लगायी गयी थी।

यह फैसला मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की सरकार के लिए एक झटका माना जा रहा है, क्योंकि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

इससे पहले, तेलंगाना हाईकोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति जी. एम. मोहीउद्दीन शामिल थे, ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों और सरकार दोनों की दलीलें सुनी थीं।

स्टे (रोक) जारी करते हुए, अदालत ने याचिकाकर्ता को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय दिया था, जबकि सरकार को दो सप्ताह में उत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।

26 सितंबर को तेलंगाना सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें राज्य के पिछड़ा वर्गों (Backward Classes) के लिए स्थानीय निकायों में सीटों और पदों पर 42% आरक्षण देने की व्यवस्था की गयी थी।

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि राज्य में पिछड़े वर्गों (Backward Classes) के लिए स्थानीय निकायों में पदों के आरक्षण के संबंध में यह निर्णय लिया गया है। 26 सितंबर की तारीख वाले एक पत्र में तेलंगाना के मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा , “तेलंगाना राज्य, जो 2 जून 2014 को अस्तित्व में आया, वह तेलंगाना के लोगों के लंबे और दृढ़ संघर्ष का परिणाम था, जिसका उद्देश्य अपने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना था। आंदोलन के प्रिय लक्ष्यों में से एक समावेशी वृद्धि और समान विकास की आवश्यकता थी, विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए।”

संविधान के समानता और सामाजिक न्याय के आदेश के अनुरूप, तेलंगाना राज्य पिछड़े वर्गों (BCs) की महत्वपूर्ण जनसँख्या  को मान्यता देता है और उनके कल्याण, समावेश और समान विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

इससे पूर्व राज्य निर्वाचन आयोग ने 29 सितंबर को एक अधिसूचना जारी कर ग्रामीण स्थानीय निकायों के चुनाव 9 अक्टूबर से नवंबर तक पाँच चरणों में कराए जाने की घोषणा की थी।